भूखों के लिए हाथ जोड़ने वाले ‘भंडारा किंग’ रमाशंकर गुप्ता

हरिद्वार की हर की पौड़ी के पास शिवसेतु पर वर्षों से गूंजने वाली एक आवाज अब हमेशा के लिए खामोश हो गई है। यह आवाज थी — “भंडारा कर दो बाबूजी…”। इसी पुकार से लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले और सोशल मीडिया पर ‘भंडारा किंग’ के नाम से प्रसिद्ध रमाशंकर गुप्ता अब इस दुनिया में नहीं रहे।

भूखों के लिए हाथ जोड़ने वाले ‘भंडारा किंग’ रमाशंकर गुप्ता
हरिद्वार हर की पौड़ी के शिवसेतु पर “भंडारा कर दो बाबूजी” की पुकार लगाने वाले भंडारा किंग रमाशंकर गुप्ता का निधन हो गया। जानिए उनकी सेवा और जीवन की कहानी।

रमाशंकर गुप्ता हर दिन हरिद्वार के शिवसेतु पर बैठकर श्रद्धालुओं से हाथ जोड़कर जरूरतमंदों, साधुओं और गरीबों के लिए भोजन कराने की अपील करते थे। उनकी बोलने की शैली बेहद सरल और भावुक थी। वे श्रद्धालुओं से कहते थे —

“भंडारा कर दो बाबूजी, 100 रुपये में 5 बाबा और 200 रुपये में 11 बाबा खाएंगे।”

समय के साथ उनकी यह पुकार हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पहचान बन गई थी। बहुत से लोग उन्हें देखते ही रुक जाते थे और अपनी श्रद्धा के अनुसार सहयोग करते थे।

सार्वजनिक शौचालय से मिला शव

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रमाशंकर गुप्ता का शव हर की पैड़ी क्षेत्र के एक सार्वजनिक शौचालय से बरामद हुआ। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया और परिजनों की तलाश शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि शुरुआती समय में पुलिस उन्हें पहचान नहीं पाई थी और शव को अज्ञात के रूप में रखा गया था।

फिलहाल उनकी मृत्यु की परिस्थितियों को लेकर पूरी जानकारी स्पष्ट नहीं है। पुलिस नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर रही है।

अपने लिए नहीं, दूसरों के लिए मांगते थे

रमाशंकर गुप्ता मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई के रहने वाले बताए जाते हैं, लेकिन लंबे समय से हरिद्वार में रह रहे थे। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों को भोजन कराने के लिए सहयोग मांगते थे।

श्रद्धालुओं से मिले सहयोग से वे गरीबों, साधुओं और जरूरतमंदों के लिए भोजन की व्यवस्था करते थे। कई लोगों ने उन्हें स्वयं रोटी-सब्जी बनाते और जरूरतमंदों में बांटते हुए देखा था। यही कारण था कि वे केवल एक सामान्य व्यक्ति नहीं रहे, बल्कि सेवा और करुणा का प्रतीक बन गए।

सोशल मीडिया से मिली पहचान

रमाशंकर गुप्ता की पहचान पहले हरिद्वार तक सीमित थी, लेकिन एक वायरल वीडियो ने उन्हें देशभर में प्रसिद्ध कर दिया। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें प्यार से ‘भंडारा किंग’ कहने लगे।

उनकी आवाज, उनका अंदाज और उनका उद्देश्य — सब कुछ लोगों के दिल को छू जाता था। वे किसी बड़े मंच पर नहीं थे, उनके पास कोई संस्था या प्रचार-प्रसार का साधन नहीं था, लेकिन उनकी नीयत में सेवा थी और यही उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई।

शिवसेतु पर अब नहीं गूंजेगी वह पुकार

हरिद्वार के शिवसेतु पर रोजाना हजारों श्रद्धालु आते-जाते हैं। इन्हीं श्रद्धालुओं के बीच रमाशंकर गुप्ता की आवाज एक परिचित भाव बन चुकी थी। अब उनके जाने के बाद वह जगह खाली महसूस होगी।

उनकी पुकार केवल भंडारा कराने की अपील नहीं थी, बल्कि वह समाज को यह याद दिलाती थी कि भूखों को भोजन कराना सबसे बड़ा धर्म है।

सनातन सेवा परंपरा की जीवंत मिसाल

रमाशंकर गुप्ता का जीवन हमें यह सिखाता है कि सेवा के लिए बहुत बड़ा धन, पद या प्रतिष्ठा जरूरी नहीं होती। कभी-कभी एक सच्ची भावना, जुड़े हुए हाथ और दयालु हृदय ही पर्याप्त होते हैं।

आज की दुनिया में जहां अधिकतर लोग अपने स्वार्थ के लिए जीते हैं, वहां रमाशंकर गुप्ता जैसे लोग यह याद दिलाते हैं कि जीवन का वास्तविक अर्थ दूसरों के काम आने में है।

सनातन धर्म में अन्नदान को महादान कहा गया है। भूखे को भोजन कराना केवल दया नहीं, बल्कि धर्म माना गया है। रमाशंकर गुप्ता ने इसी भावना को अपने जीवन का आधार बनाया।

‘भंडारा किंग’ रमाशंकर गुप्ता भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज और सेवा की भावना लोगों के मन में लंबे समय तक जीवित रहेगी। हरिद्वार की हर की पौड़ी और शिवसेतु पर जब भी कोई भूखे को भोजन कराएगा, तब कहीं न कहीं रमाशंकर गुप्ता की वह पुकार फिर याद आएगी —

भंडारा कर दो बाबूजी…

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