संस्कृत भाषा के दस महान कवि (Sanskrit ke 10 kavi)

संस्कृत कवि – संस्कृत हमारी सबसे प्राचीन भाषा होने के साथ-साथ देवभाषा (देवताओं द्वारा बोली जाने वाली भाषा) भी है| हिन्दूओं के जितने भी धार्मिक ग्रन्थ है वे पहले सभी संस्कृत भाषा में ही लिखे गये थे जैसे – चारों वेद, रामायण, महाभारत आदि| इसके अलावा संस्कृत सभी भाषाओं की जननी भी है| हम जितनी भाषाएँ बोलते है उन सभी की उत्पत्ति संस्कृत भाषा से ही हुई है| आज हम उन्ही में से कुछ प्रमुख संस्कृत कवि या संस्कृत के लेखक के बारे बताएँगे ताकि आप ज्ञान कमा या ज्ञान अर्जित कर सके।

संस्कृत भाषा के दस महान कवि (Sanskrit ke 10 kavi)

संस्कृत साहित्य के कवि और उनकी रचनाएँ –

Famous sanskrit kavi  – प्राचीनकाल में बहुत सारे sanskrit sahitya ke kavi हुआ करते थे, वे सभी अपनी कवितायेँ संस्कृत भाषा में ही लिखा करते थे| क्योंकि उस समय गुरुकुल में शिष्यों को संस्कृत भाषा ही पढाई जाती थी| इसलिए जितने भी ग्रन्थ ,साहित्य और कवितायेँ होती थी वे सभी संस्कृत में ही होती थी| हालाँकि भारत में आधुनिक संस्कृत कवि भी हुए है लेकिन हम यहाँ प्राचीन संस्कृत कवियो के बारे में जानते है।

लेकिन धीरे-धीरे यह भाषा विलुप्त होने लगी इसकी जगह अन्य भाषाओं ने ले ली| ऐसा लगता है कि अब यह भाषा कही इतिहास बनकर ही न रह जाए| क्योंकि आजकल के बच्चे इस भाषा को न तो पढ़ते है और न पढ़ना चाहते है|

लेकिन हमें अपनी संस्कृति को कभी भूलना नहीं चाहिए ,इसलिए आज हम आपको sanskrit ke kaviyon ka parichay कराने जा रहे है| जिन्होंने संस्कृत में अनेक ग्रन्थ व रचनाएँ लिखी|

तो चलिए जानते है उन कवियों के जीवन से संबंधित विशेष बातों को ,ताकि जब आपसे कोई sanskrit ke kavi ke naam पूछे तो आप बता सको|

Sanskrit ke kavi aur unki rachnayen –

वैसे तो sanskrit bhasha ke kavi बहुत सारे है लेकिन हम आपको 10 sanskrit ke mahan kavi ke naam संस्कृत के महापुरुष बताने जा रहे है| जिन्होंने संस्कृत भाषा में बहुत सारी रचनाएँ लिखी| यहाँ उन संस्कृत साहित्यकारों / संस्कृत के महापुरुषों के नाम इस प्रकार है, 10 sanskrit kavi names –

  1. देवर्षि रमानाथ शास्त्री : यह sanskrit ke prasidh kavi है| इनका जन्म सन 1878 राजस्थान के जयपुर में देवर्षि परिवार में हुआ था| रमानाथ शास्त्री के पिता का नाम द्वारकानाथ तथा माता का नाम जानकी देवी था| रमानाथ शास्त्री को संस्कृत भाषा में बहुत रूचि थी इसलिए वे बचपन से ही संस्कृत में कविता लिखने लगे थे| वे श्रीमद्भागवत के विद्वान तथा कथावाचक थे| वे sanskrit में दिल को छु जाने वाले श्लोक लिखते थे| इसके अलावा हिंदी व ब्रजभाषा में भी उनकी बहुत सी रचनाएँ है| उनकी मृत्यु सन 1943 में नाथद्वारा में हुई थी|

Devarshi Ramanath Shastri की प्रमुख रचनाएँ – स्तुतिपारिजातम ,दर्शनादर्श: ,छंदोंग्योपनिषद भाष्यं ,दु:खिनीबाला आदि|

  1. अश्वघोष – अश्वघोष बोद्धधर्म के कट्टर अनुयायी और संस्कृत भाषा के महाकवि थे| उनका जन्म अयोध्या के साकेत में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था| ब्राह्मण होते हुए भी उन्होंने बौद्ध धर्म की शिक्षा ली थी| उन्हें अनेक उपाधि जैसे – महाकवि ,महाराज ,महापंडित ,महावादी ,आर्यभदन्त आदि प्राप्त की थी| वे महाभारत, रामायण और वैदिक साहित्य के ज्ञाता थे|

अश्वघोष की प्रमुख रचनाएँ – शारिपुत्रप्रकरणम  ,बुद्धचरितम ,सौन्दरानंदकाव्यम ,गंडीस्त्रोतगाथा आदि|

  1. जल्हण – इनका पूरा नाम जल्हणदेव राव था| यह संस्कृत भाषा के राजस्थानी कवि थे| इसके पिता नाम चंदबरदाई राव था और वे ब्रजभाषा के महाकवि थे| जल्हण ने वैसे तो बहुत से ग्रन्थ लिखे है लेकिन इनका ‘सोमपाल विलास’ ग्रंथ ऐतिहासिक महाकाव्य है|

जल्हण की प्रमुख रचनाएँ – सुक्तिमुक्तावली ,सोमपाल विलास ,मुग्धोपदेश ,सुभाषित मुक्तावली ,सप्तशती छाया आदि|

  1. बाणभट्ट – इनका जन्म सोन नदी के तट पर स्थित प्रीतिकूट ग्राम में हुआ था| इनके पिता का नाम चित्रभानु और माता का नाम राज्यदेवी था| बाणभट्ट एकमात्र ऐसे संस्कृत कवि है जिनके जीवन के बारे में पर्याप्त जानकारी मिलती है| वे सातवीं शताब्दी के प्रसिद्ध कवि थे| कहते है जब बाणभट्ट ‘कादम्बरी’ लिख रहे थे तभी उनका निधन हो गया था तो उनके पुत्र भूषणभट्ट ने ‘कादंबरी’ को पूर्ण किया|

बाणभट्ट की प्रमुख रचनाएँ – हर्षचरितम ,कादंबरी आदि|

  1. अप्पय दीक्षित – यह संस्कृत के काव्यशास्त्री और व्याख्याकार थे| इनका जन्म तमिलनाडु में हुआ था| दीक्षित ‘अव्दैतवादी’ थे लेकिन फिर भी उनका ‘शैवमत’ के प्रति विशेष लगाव था| वैसे तो इन्होने लगभग 400 ग्रंथों की रचना की है लेकिन कुवलयानन्द और चित्रमीमांसी ग्रन्थ सबसे प्रसिध्द है|

अप्पय दीक्षित की प्रमुख रचनाएँ – चित्रमीमांसी ,वृत्तिवार्तिकम , कुवलयानन्द ,लक्षणरत्नावली आदि|

  1. क्षेमेन्द्र – यह संस्कृत भाषा के कश्मीरी महाकवि थे| इनका जन्म ब्राह्मण परिवार में हुआ था तथा इनके पिता का नाम प्रकाशेन्द्र था| इन्होने अनेक महाकाव्यों जैसे –रामायण ,महाभारत आदि का संक्षिप्त में वर्णन किया है| कहते है इनके जैसा संस्कृत का परिहास कथा लेखक कोई नहीं है|

Kshemendra की प्रमुख रचनाएँ – रामायणमंजरी, भारतमंजरी, ब्रह्त्कथामंजरी, समयमात्रिका, दशावतारचरित आदि|

  1. राजशेखर – यह संस्कृत भाषा के प्रसिद्ध कवि और नाटककार थे ,लेकिन नाटक से ज्यादा कविताओं में उन्हें रूचि थी| इनका जन्म महाराष्ट्र में हुआ था लेकिन जीवनकाल बंगाल में बीता| इनके पिता का नाम दुहिक और माता का नाम शिलावती था| वे राजा महेन्द्रपाल के मंत्री और उनके बेटे महिपाल के गुरु थे|

Rajasekhara की प्रमुख रचनाएँ – बाल रामायण , काव्यमीमांसी ,बाल भारत ,कर्पूरमंजरी आदि|

  1. गोस्वामी हरिकृष्ण शास्त्री – इनका जन्म सन 1904 में जयपुर के महापुरा में हुआ था| इनके पिता का नाम गोपीकृष्ण गोस्वामी और माता का नाम एनादेवी था| वे संस्कृत के कवि होने के साथ-साथ साहित्य ,न्याय शास्त्र और वेदांत दर्शन के ज्ञाता थे| इन्होने अपने ग्राम महापुरा में बच्चों को संस्कृत का ज्ञान देने के लिए ‘संस्कृत पाठशाला’ खोली| उन्होंने अपने जीवनकाल में संस्कृत में बहुत सारी रचनाएँ की और सन 1979 में उनका निधन हो गया|

Goswami Harikrishna Shastri की प्रमुख रचनाएँ – दिव्यलोक, कल्पलता, वंशप्रशस्ति आदि|

  1. कालिदास – कालिदास के जन्म के बारे में किसी को सही जानकारी नहीं है लेकिन कहते है कि कालिदास को उज्जैन से बहुत लगाव था इसलिए उनकी जन्मभूमि वही होगी| वे राजा विक्रमादित्य के दरबार के नवरत्नों में से एक थे| वे संस्कृत भाषा के महान कवि थे| उन्होंने अपने जीवनकाल में बहुत सारे महाकाव्य और खंडकाव्य की रचनाएँ की थी| कालिदास अपनी रचनाओं में मधुर और सरल भाषा ,अलंकार युक्त शब्द ,श्रंगार रस का उपयोग करते थे|

Kālidāsa की प्रमुख रचनाएँ – रघुवंशम ,कुमारसंभवम ,मेघदूत ,ऋतूसंहारम ,श्रुतबोधम ,सेतुकाव्यम ,श्यामा दण्डकम आदि|

  1. मंखक – इनका जन्म 1100 ईसवी के आसपास प्रवरपुर (कश्मीर में सिंधु व वितस्ता के संगम) नामक ग्राम में हुआ था| वे संस्कृत भाषा के महान कवि और ज्ञानी थे| उन्होंने अपने गुरु आचार्य रुय्यक से व्याकरण ,साहित्य ,ज्योतिष और अन्य ग्रंथों का ज्ञान प्राप्त किया था|

Kavi Mankhaka की प्रमुख संस्कृत में रचनाएँ –

  • मंखकोश
  • श्रीकंठचरित महाकाव्य

 

डिस्क्लेमर – हालाँकि ये sanskrit kaviyon ke naam जानकारी ओपनसोर्स पब्लिक डोमेन से प्राप्त जानकारी के अनुसार है, कृपया अपनी पुस्तकों से अवश्य मिलान करे।

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