After all, what has Modi actually done for the farmers?
नमस्ते दोस्तों! आज हम बात करेंगे हमारे देश की रीढ़—हमारे अन्नदाताओं यानी किसानों के बारे में। खेती हमेशा से एक मुश्किल काम रहा है, जहाँ कभी मौसम की मार तो कभी सही दाम न मिलने का डर सताता है। लेकिन 2014 से लेकर आज 2026 तक के सफर पर नज़र डालें, तो सरकार ने किसानों की इन परेशानियों को दूर करने के लिए पूरी ताकत लगा दी है।

मोदी सरकार का लक्ष्य बिल्कुल साफ रहा है: किसानों की आय दोगुनी करना, खेती को सुरक्षित बनाना और नई तकनीक को गाँव-गाँव तक पहुँचाना।
आइए, बिल्कुल सरल भाषा में समझते हैं कि पिछले 12 सालों में ऐसा क्या-क्या हुआ जिसने इस सरकार को किसानों के लिए एक ‘वरदान’ बना दिया।
1. सीधा बैंक खाते में पैसा और बुढ़ापे का सहारा (आय सहायता) –
पहले किसान छोटी-छोटी ज़रूरतों (जैसे बीज या खाद) के लिए साहूकारों पर निर्भर रहते थे।
PM-Kisan Samman Nidhi (2019): इस योजना ने सब बदल दिया। अब हर साल किसानों के बैंक खाते में सीधे ₹6,000 आते हैं। बिना किसी बिचौलिए के!
PM Kisan Maan Dhan Yojana: सरकारी नौकरी वालों की तरह अब किसानों को भी बुढ़ापे में पेंशन की सुविधा मिल रही है, ताकि उम्र ढलने पर उन्हें किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े।
2. फसल का नुकसान अब किसान का नुकसान नहीं (सुरक्षा और बीमा) –
खेती में सबसे बड़ा डर होता है बेमौसम बारिश या सूखे का।
PM Fasal Bima Yojana (2016): अगर कुदरत की मार से फसल बर्बाद हो जाए, तो यह योजना ढाल बनकर खड़ी होती है और किसान को नुकसान का पैसा (क्लेम) मिलता है।
PM-AASHA: किसान जो उगाता है, उसका सही दाम (MSP) उसे मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए यह योजना लाई गई।
3. मिट्टी की सेहत और हर खेत को पानी (सिंचाई और कृषि सुधार) –
जैसे हमें डॉक्टर से चेकअप की ज़रूरत होती है, वैसे ही खेतों को भी होती है।
Soil Health Card (2014-15): इससे किसान को पता चलता है कि उसकी ज़मीन में किस खाद की ज़रूरत है और किसकी नहीं। इससे खाद का फालतू खर्च बचा और पैदावार बढ़ी।
PM Krishi Sinchai Yojana (PMKSY): “Per Drop More Crop” (हर बूंद से ज़्यादा फसल) के मंत्र के साथ ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा दिया गया, ताकि कम पानी में भी अच्छी खेती हो सके।
4. ज़हर-मुक्त खेती की तरफ वापसी (जैविक और प्राकृतिक खेती) –
रसायनों से ज़मीन बंजर हो रही थी और बीमारियाँ बढ़ रही थीं।
परंपरागत कृषि विकास योजना (2016) और National Mission on Natural Farming (2022) के ज़रिए सरकार ने किसानों को वापस अपनी जड़ों से जोड़ा। अब बिना यूरिया-डीएपी के प्राकृतिक तरीके से खेती करने पर ज़ोर दिया जा रहा है, जिससे फसल भी अच्छी होती है और सेहत भी।
5. खेती में भी आई नई टेक्नोलॉजी (डिजिटल और तकनीकी पहलें) –
आज का किसान सिर्फ खेत में पसीना नहीं बहाता, बल्कि स्मार्ट भी बन रहा है।
e-NAM (2017): यह एक ऑनलाइन मंडी है। अब किसान घर बैठे देश की किसी भी मंडी में अपनी फसल बेच सकता है, जहाँ उसे सबसे अच्छा दाम मिले।
Namo Drone Didi (2023): यह सबसे क्रांतिकारी कदमों में से एक है! गाँव की महिला किसानों को ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि वे खेतों में दवा या खाद का छिड़काव आसानी से कर सकें।
Digital Agriculture Mission: अब AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और बिग डेटा से किसानों को मौसम और फसल की सटीक जानकारी मिल रही है।
6. खेती के अलावा भी कमाई के रास्ते (विविधीकरण) –
सिर्फ गेहूँ-चावल से किसान अमीर नहीं बन सकता। इसलिए सरकार ने कमाई के नए तरीके खोले:
शहद उत्पादन (National Beekeeping Mission): मधुमक्खी पालन से मीठी क्रांति आई।
बांस की खेती (National Bamboo Mission): बांस को पेड़ की कैटेगरी से हटाकर घास में डाला गया, ताकि किसान इसे आसानी से उगा और बेच सकें।
फलों, सब्ज़ियों (Horticulture) और पशुपालन (Dairy) को बढ़ावा देने के लिए भी कई बड़े कदम उठाए गए।
2014 से 2026 का यह सफर बताता है कि खेती अब सिर्फ पेट पालने का ज़रिया नहीं रह गई है, बल्कि यह एक मुनाफे का व्यवसाय बन रही है। बीज से लेकर बाज़ार तक, और मिट्टी से लेकर ड्रोन तक—सरकार ने हर कदम पर किसान का हाथ थामा है। सच कहा जाए तो, ये योजनाएँ भारत के किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं, जो उन्हें एक सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की तरफ ले जा रही हैं।
मोदी सरकार ने इस भ्रष्टाचार को डंडे से नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी (Technology) और स्मार्ट नीतियों से रोका है।
1. बिचौलियों की छुट्टी (Direct Benefit Transfer – DBT) –
पहले किसानों को मिलने वाली सब्सिडी या मुआवजे का पैसा कई हाथों (सरकारी बाबू, पटवारी, ग्राम प्रधान) से होकर गुजरता था, जहाँ हर कोई अपना ‘कमीशन’ काटता था।
क्या बदला: अब सरकार ने पूरा सिस्टम डिजिटल कर दिया है। PM-KISAN या किसी भी मुआवजे का पैसा एक क्लिक में सीधे किसान के बैंक खाते में जमा होता है। बीच में कोई बिचौलिया नहीं, इसलिए ₹1 की भी हेराफेरी नहीं हो सकती।
2. यूरिया की कालाबाजारी का अंत (Neem Coated Urea) –
कुछ साल पहले तक किसानों को खाद (यूरिया) के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ता था और पुलिस की लाठियां खानी पड़ती थीं। इसका कारण यह था कि किसानों के हिस्से का सस्ता यूरिया, चोरी-छिपे केमिकल, पेंट और प्लाईवुड बनाने वाली फैक्ट्रियों को ब्लैक में बेच दिया जाता था।
क्या बदला: सरकार ने यूरिया पर ‘नीम का लेप’ (Neem Coating) लगाना शुरू कर दिया। नीम कोटिंग के बाद वह यूरिया फैक्ट्रियों के किसी काम का नहीं रहा, उसका इस्तेमाल सिर्फ खेतों में ही हो सकता था। इससे यूरिया की कालाबाजारी 100% खत्म हो गई और किसानों को आसानी से खाद मिलने लगी।
3. मंडी के माफियाओं पर लगाम (e-NAM) –
पहले लोकल मंडियों में आढ़तिये (middlemen) आपस में गुट बना लेते थे और किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर फसल को औने-पौने दामों पर खरीदते थे। वजन तौलने में भी खूब चोरी होती थी।
क्या बदला: सरकार ने e-NAM (राष्ट्रीय कृषि बाजार) नाम से एक ऑनलाइन पोर्टल बना दिया। अब किसान अपने मोबाइल पर देश की किसी भी मंडी का रेट देख सकता है। जहाँ उसे सबसे ज़्यादा दाम मिलेगा, वह अपनी फसल वहीं बेच सकता है। डिजिटल कांटों (Digital weighing) ने तौल की चोरी भी रोक दी।
4. जमीन के रिकॉर्ड्स में घूसखोरी पर रोक (Digital Land Records) –
पहले खसरा, खतौनी (जमीन के कागजात) या जमीन की नकल निकलवाने के लिए किसानों को पटवारी या लेखपाल के कई चक्कर काटने पड़ते थे और काम करवाने के लिए रिश्वत देनी पड़ती थी।
क्या बदला: सरकार ने ज़मीन के रिकॉर्ड्स का डिजिटलीकरण कर दिया। अब किसान अपने मोबाइल फोन या नज़दीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) से मात्र कुछ रुपयों की फीस देकर अपनी ज़मीन के कागज़ ऑनलाइन निकाल सकता है। ‘स्वामित्व योजना’ के तहत किसानों को उनके घरों के प्रॉपर्टी कार्ड भी दिए जा रहे हैं, जिससे ज़मीन कब्ज़ाने का डर खत्म हो गया है।
5. फसल नुकसान के मुआयने में पारदर्शिता (Drones & Satellites) –
पहले जब ओलावृष्टि या सूखे से फसल बर्बाद होती थी, तो अधिकारी खेत का मुआयना करने आते थे। अक्सर वे अच्छी रिपोर्ट बनाने और ज़्यादा मुआवजा पास करवाने के नाम पर किसानों से घूस मांगते थे।
क्या बदला: अब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत सैटेलाइट (Satellite) और ड्रोन्स (Drones) का इस्तेमाल किया जा रहा है। सीधे आसमान से खेत की तस्वीरें ली जाती हैं, डेटा सिस्टम में जाता है और बिना किसी इंसानी दखल के नुकसान का सटीक अंदाज़ा लगाकर सीधे खाते में क्लेम भेज दिया जाता है।
भ्रष्टाचार रोकने का सबसे अचूक तरीका था—सिस्टम से इंसानी दखल (Human Interference) को खत्म करना। सरकार ने फाइलों और बाबुओं की जगह मोबाइल, इंटरनेट और बैंक खातों को दे दी। जब पैसा और जानकारी सीधे किसान के हाथ में आ गई, तो भ्रष्टाचार के सारे रास्ते अपने आप बंद हो गए।
तो मोदी ने देश से झूठ क्यों बोला, करोड़ों किसानों के साथ धोखा क्यों किया?
मुझे लगता है, अगर झूठ की ताकत पर किसी को झुकाना हो तो आप बोल सकते है कि जोगिन्दर नाथ मंडल की जगह मोदी ने 1947 के बटवारा करवाया। और फिर उन करोड़ों हिंदुओं को उनके हाल पर पाकिस्तान में छोड़ दिया। जो अब घटकर 2% बचे हैं। जो पहले 30-40 प्रतिशत थे।
तो क्या वास्तव में भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोल दिया गया है?
अगर राजनीति करने वाले लोग सरकार के कृषि और डेयरी क्षेत्रों को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलने के दावों का खंडन को ही झूठा कहे। तो हो सकता है कि जोगिन्दर नाथ मंडल की जगह मोदी ने 1947 का बटवारा करवाया होगा?
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2225177®=22&lang=13
अब आप स्वयं सोचिये, कि क्या किसी अन्य देश का प्रधानमंत्री या सरकार अपने किसानों के लिए इतना कर पायी है ? या कर पाएगी ? समय, योजना और उसमें लगने वाला पैसा सबको तोलकर इंटरनेट पर दूसरे देशों के बारे में सर्च कीजिए।
नोट – योजनाओं की जानकारी की लिस्ट पब्लिक डोमेन में उपलब्ध जानकारियों के माध्यम से है। गलती की संभावना है।
