कलपक्कम में PFBR ने हासिल की पहली क्रिटिकलिटी 6 अप्रैल 2026 की रात 8 बजकर 25 मिनट पर भारत ने वह कर दिखाया, जो दशकों से एक सपना था।तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित 500 मेगावाट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने पहली बार सफलतापूर्वक क्रिटिकलिटी प्राप्त कर ली — यानी रिएक्टर के भीतर एक नियंत्रित परमाणु श्रृंखला प्रतिक्रिया अब स्वयं को बनाए रख सकती है। यह वह पल है जिसका इंतजार भारत के परमाणु वैज्ञानिक 1980 के दशक से कर रहे थे।इस उपलब्धि के साथ भारत, रूस के बाद दुनिया का दूसरा देश बन गया है जिसने वाणिज्यिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर को क्रिटिकलिटी तक पहुँचाया है।

क्रिटिकलिटी क्या होती है? सरल भाषा में समझें

जब एक परमाणु रिएक्टर में विखंडन (fission) से उत्पन्न न्यूट्रॉन, अवशोषण और रिसाव में खोए न्यूट्रॉन के बराबर हो जाते हैं — तो श्रृंखला प्रतिक्रिया स्थिर और स्वनिर्भर बन जाती है। इसे ही ‘फर्स्ट क्रिटिकलिटी’ कहते हैं।यह किसी रिएक्टर की “पहली साँस” जैसी होती है। क्रिटिकलिटी के बाद ही रिएक्टर धीरे-धीरे पूरी क्षमता पर बिजली उत्पादन की ओर बढ़ता है। अब PFBR को चरणबद्ध तरीके से पावर बढ़ाया जाएगा और AERB की मंजूरी के बाद इसे राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ा जाएगा।

PFBR क्यों है इतना खास? — यह रिएक्टर जितना जलाता है, उससे ज़्यादा बनाता है?

पारंपरिक रिएक्टर ईंधन खर्च करते हैं, लेकिन PFBR एक अलग ही तकनीक पर काम करता है। रिएक्टर का कोर यूरेनियम-प्लूटोनियम MOX ईंधन से चलता है। इसके चारों ओर यूरेनियम-238 का एक आवरण (blanket) होता है। तेज़ न्यूट्रॉन इस यूरेनियम-238 को फिसाइल प्लूटोनियम-239 में बदल देते हैं — यानी रिएक्टर खुद नया ईंधन पैदा करता रहता है। इसीलिए इसे “Breeder” कहा जाता है। इसके अलावा भविष्य में इस आवरण में थोरियम-232 का उपयोग किया जाएगा, जो यूरेनियम-233 में बदलेगा — और यही भारत के परमाणु कार्यक्रम के तीसरे चरण की नींव है।

 

भारत का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम — एक दूरदर्शी रणनीति

यह कार्यक्रम भारत के महान वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने 1950 के दशक में तैयार किया था। इसकी विशेषता यह है कि यह भारत की अपनी संसाधन वास्तविकता को ध्यान में रखकर बनाया गया है — भारत के पास यूरेनियम कम है, लेकिन थोरियम के दुनिया के सबसे बड़े भंडारों में से एक यहाँ मौजूद है।

चरण I — प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWR): प्राकृतिक यूरेनियम से बिजली उत्पादन और प्लूटोनियम का निर्माण। यह चरण पहले से सक्रिय है।

चरण II — फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR): प्लूटोनियम और यूरेनियम से बिजली, साथ ही थोरियम को यूरेनियम-233 में बदलना। PFBR की क्रिटिकलिटी इसी चरण की सफलता है।

चरण III — थोरियम आधारित रिएक्टर: यूरेनियम-233 से थोरियम चक्र चलाना। भारत के विशाल थोरियम भंडारों का पूरा उपयोग इसी चरण में होगा।

स्वदेशी गौरव — 200 से ज़्यादा भारतीय उद्योगों की भागीदारी

यह केवल एक रिएक्टर नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत का जीता-जागता उदाहरण है। PFBR का डिज़ाइन IGCAR ने किया और निर्माण BHAVINI ने। इस परियोजना में 200 से अधिक भारतीय उद्योगों ने भागीदारी की, जिनमें कई MSME भी शामिल हैं। AERB (Atomic Energy Regulatory Board) की कड़ी सुरक्षा समीक्षा के बाद ही क्रिटिकलिटी की अनुमति दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर कहा — “यह उन्नत रिएक्टर हमारी वैज्ञानिक क्षमता की गहराई और इंजीनियरिंग उद्यम की ताकत को दर्शाता है।”

एक लंबे इंतजार की कहानी –

यह यात्रा आसान नहीं रही। 2004 में निर्माण शुरू हुआ था और लक्ष्य था 2010 में कमीशनिंग। लेकिन तकनीकी चुनौतियाँ, पहली बार की जाने वाली तकनीक की जटिलताएं और लागत में दोगुनी वृद्धि — इन सबने यात्रा को लंबा खींचा। अक्टूबर 2025 में अंतिम ईंधन लोडिंग शुरू हुई और 6 अप्रैल 2026 को इतिहास रचा गया।

🇮🇳 भारत का परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम

भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित 500 मेगावाट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने पहली बार सफलतापूर्वक क्रिटिकलिटी प्राप्त कर ली है।

इस उपलब्धि के साथ भारत, रूस के बाद दुनिया का दूसरा देश बन गया है, जिसने वाणिज्यिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर को इस स्तर तक पहुँचाया है।


🔍 मुख्य जानकारी

  • स्थान: कलपक्कम, तमिलनाडु
  • रिएक्टर: 500 MWe PFBR
  • तारीख: 6 अप्रैल 2026, रात 8:25 बजे
  • निर्माता: BHAVINI

⚙️ PFBR क्यों खास है?

यह रिएक्टर जितना ईंधन उपयोग करता है, उससे अधिक फिसाइल सामग्री (प्लूटोनियम और यूरेनियम-233) उत्पन्न करता है।

  • ईंधन का बेहतर उपयोग
  • ऊर्जा उत्पादन की लागत में कमी
  • थोरियम आधारित भविष्य के लिए मार्ग

🌍 इसका महत्व

  • ऊर्जा सुरक्षा: दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता
  • तकनीकी क्षमता: पूरी तरह स्वदेशी विकास
  • वैश्विक पहचान: उन्नत परमाणु तकनीक में भारत अग्रणी

⚛️ भारत का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम

  1. PHWR
  2. PFBR
  3. थोरियम आधारित रिएक्टर

🧾 निष्कर्ष

कलपक्कम PFBR की क्रिटिकलिटी भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और थोरियम आधारित भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है।

 

आगे क्या? — बिजली उत्पादन और विस्तार की राह –

क्रिटिकलिटी मंजिल नहीं, शुरुआत है। अब रिएक्टर को धीरे-धीरे पूरी क्षमता तक लाया जाएगा। AERB की मंजूरी के बाद इसे राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ा जाएगा। इसके बाद कलपक्कम में दो और फास्ट ब्रीडर रिएक्टर बनाने की योजना है।

यह उपलब्धि Union Budget 2025-26 में घोषित उस लक्ष्य की दिशा में भी एक ठोस कदम है, जिसमें 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल भारत की कुल परमाणु क्षमता मात्र 8.78 GW है।

PFBR की क्रिटिकलिटी केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है — यह उस भारत की कहानी है जो अपनी ऊर्जा आज़ादी खुद लिखना चाहता है। थोरियम के विशाल भंडारों वाले इस देश के लिए यह रिएक्टर एक पुल है — आज के यूरेनियम युग से कल के थोरियम युग तक।

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