हर साल Salary ज्यादा बढ़ती है या Rent ?

भारत की मेट्रो सिटी में महंगाई का असली हीरो कौन है?

हर साल Salary ज्यादा बढ़ती है या Rent ?
हर साल Salary ज्यादा बढ़ती है या Rent ?

पेट्रोल? सब्ज़ी? दूध? चाहे चाचा की चायुमीन हो, या गरम कुत्ते अर्थात हॉट डॉग हो या जयपुर की जलेबी ?

नहीं साहब, असली हीरो तो किराया है।

किराया (Rent) – Salary का बड़ा भाई

हर साल तनख्वाह बढ़े या न बढ़े, किराया ज़रूर बढ़ता है।

तनख्वाह: “इस साल 5% बढ़ी है।”

किराया: “अरे भाई, मैं तो 15% से कम बढ़ता ही नहीं।”

कर्मचारी सोचता है – “बॉस से वेतन बढ़वाना मुश्किल है, लेकिन मकान मालिक से किराया बढ़वाना आसान।”

मकान मालिक कहता है – “मकान खाली पड़े रहने दो, लेकिन किराया कम नहीं करेंगे।”

यानी मकान मालिक का आत्मविश्वास Sensex से भी तेज़ चढ़ता है।

सभी चीज़ो के दाम भी मकान मालिक ही बढ़ाता है। और उससे दुकानदार का गणित बिगड़ता है।

दुकानदार का किराया बढ़ा → सामान महंगा हुआ → ग्राहक की जेब खाली हुई।

ग्राहक सोचता है – “सैलरी तो इस साल भी बढ़ कर मिली है, लेकिन झटका क्यों लग रहा है?”

दुकानदार मुस्कुराता है – “भाई, किराया मैं दूँगा तो वसूली तुमसे ही होगी।”

समाधान – किराया नियंत्रण विभाग जो रेंट एग्रीमेंट को भी बनाये।

अब ज़रूरत है एक ऐसे विभाग की, जहाँ से Rent Agreement डाउनलोड हो सके, जहाँ मकान मालिक की मनमानी पर रोक लगे, और जहाँ किराएदार को लगे – “हाँ, अब मेरी तनख्वाह और किराया एक ही भाषा बोल रहे हैं।”

भारत की मेट्रो सिटी में महंगाई का सबसे बड़ा कारण किराए का लगातार बढ़ना है। चाहे घर हो या दुकान, हर साल 10-20% किराया बढ़ा दिया जाता है। इस वजह से आम आदमी की जेब पर बोझ पड़ता है और दुकानदार भी अपने सामान की कीमतें बढ़ा देते हैं। महंगाई का असली कारण किराया है। तनख्वाह तो धीरे-धीरे बढ़ती है, लेकिन किराया हर साल दौड़ में Usain Bolt बन जाता है।

Leave a comment

Discover more from हिंदीहैं.com

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading