आज के डिजिटल दौर में OTT प्लेटफॉर्म्स (Netflix, Prime, Hotstar आदि) की डिमांड चरम पर है। इसी का फायदा उठाने के लिए बाजार में कई B2B OTT Aggregators आ गए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस चमक-धमक वाले बिजनेस के पीछे एक ऐसा ‘खेल’ चल रहा है, जो छोटे व्यापारियों को बर्बाद कर रहा है? सुनने में यह पारंपरिक FMCG या DTH मॉडल जैसा लगता है, लेकिन असलियत कुछ और है। अगर आप एक Smart TV शोरूम के मालिक हैं, TV Box बेचते हैं या एक ISP (Internet Service Provider) हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बहुत जरूरी है।

कौन हो रहा है सबसे ज़्यादा प्रभावित?

  • Smart TV बेचने वाले
  • Smart TV Box बनाने और बेचने वाले
  • Internet Service Providers (ISP)
  • छोटे Cable Operator
  • नया बिजनेस शुरू करने वाले लोग

इनका मुख्य निशाना वो लोग हैं जिनके पास OTT मार्केट का सीमित अनुभव होता है, या जिनके पास पहले से टीवी खरीदने वाले या इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले ग्राहक मौजूद हैं। इन लोगों को बताया जाता है कि अगर वे OTT Aggregator के साथ जुड़ते हैं तो उन्हें भारी मुनाफा मिलेगा। और कहा जाता है कि आप Best OTT Aggregator in India के पार्टनर बन जायेगे। और वे OTT Aggregator Business model के पीछे छिपे SCAM को समझ नहीं पाते है।

Dream Selling का खेल –

Sales Executives इन Dealers और Distributors को “डिजिटल गोल्डमाइन” का सपना दिखाते हैं। उनसे मोटी रकम ली जाती है। बदले में Aggregator उनके अकाउंट में Digital Money डालता है। या उतने कीमत के कूपन दे देते है। यह Digital Money या कूपन असल में Expiry Date के साथ आता है। यानी Dealer ने जो निवेश किया था, वह हवा हो जाता है।

Expiry Date का Trap –

इन B2B OTT Aggregator Business कंपनियों के सेल्स एग्जीक्यूटिव्स आपके पास एक ‘सुनहरा सपना’ लेकर आते हैं। वो आपको बताते हैं कि आप उनके पार्टनर बनकर लाखों कमा सकते हैं। वह इस Digital Money से OTT Plans बेचकर कमाई करे। आपसे डिस्ट्रीब्यूटर या डीलर बनने के नाम पर एक मोटी रकम (जैसे ₹50,000 से ₹50 लाख तक) ली जाती है।

लेकिन –

असली ‘Scam’ यहाँ छुपा है –

ज्यादातर डीलर इस बात को समझ नहीं पाते कि जो पैसा उन्होंने निवेश किया है, आपकी दी गई रकम को आपके ही पोर्टल में ‘डिजिटल वॉलेट’ या ‘क्रेडिट्स’ के रूप में वापस डाल दिया जाता है। आपको लगता है कि आपका पैसा सुरक्षित है। लेकिन उस पर एक ‘Expiry Date’ लगी होती है। मान लीजिए आपने ₹1,00,000 दिए और कंपनी ने उसे आपके वॉलेट में डाल दिया। अब नियम यह होता है कि आपको ये प्लान्स 3 या 6 महीने के अंदर ही बेचने हैं। अगर आप तय समय में वो प्लान्स नहीं बेच पाए, तो आपका बचा हुआ सारा बैलेंस ‘Lapse’ (शून्य) हो जाता है।

Scam क्यों है?

  • असली बिज़नेस में Inventory या Service कभी Expiry Date के साथ नहीं आती।
  • यहां Aggregator का फायदा तय है, लेकिन Dealer का नुकसान लगभग निश्चित है।
  • बिना स्पष्ट एक्सपायरी और रिफंड नीति बताना भ्रामक व्यापार व्यवहार माना जा सकता है
  • पूरा जोखिम डीलर पर डालना अनफेयर प्रैक्टिस की श्रेणी में आता है
  • यह मॉडल Ponzi Scheme जैसा है, जहां नए लोगों से पैसा लेकर उन्हें सपने दिखाए जाते हैं।
  • यह मॉडल जोखिम साझा करने की बजाय जोखिम ट्रांसफर करता है।

मुनाफा किसका? –

कंपनी ने आपसे असली कैश ले लिया, लेकिन आपको बदले में ‘डिजिटल हवा’ दी जिसकी एक समय सीमा थी। आपका निवेश डूब गया और कंपनी का मुनाफा पक्का हो गया।

OTT प्लान क्यों नहीं बिक पा रहे?

  • इन डीलर्स से पता चलता है कि अधिकतर ग्राहक पहले से ही OTT प्लेटफॉर्म के Direct सब्सक्राइबर हैं
  • Aggregator के प्लान महंगे और कम भरोसेमंद माने जाते हैं
  • Brand पहचान और ग्राहक विश्वास की कमी
  • ज्यादातर OTT प्लेटफार्मस अपने पुराने कंटेंट को नए कंटेंट के साथ मिलाकर दे रहे है, जो लोग पहले ही देख चुके है।
  • और कुछ व्यक्तिगत कारण

इस वजह से डीलर चाहकर भी अपने क्रेडिट को बिक्री में नहीं बदल पाते।

डीलरों पर बढ़ता आर्थिक दबाव –

कई डीलरों का कहना है कि Sales Executive पहले पैसा लेकर “डिजिटल बैलेंस” डाल देते हैं, जिससे लगता है कि रकम सुरक्षित है। लेकिन हकीकत में यह सिर्फ एक समय-सीमित एंट्री होती है, जो एक्सपायर होते ही शून्य हो जाती है। यह मॉडल असल में सही बिज़नेस नहीं बल्कि एक Financial Trap है। OTT Aggregator अपने Sales Executives के जरिए Dealers और Distributors को Dream Sell करते हैं, लेकिन असलियत में यह Expiry-Based Digital Money Scam है। अगर आप Smart TV, TV Box या ISP बिज़नेस में हैं, तो ऐसे Aggregator से जुड़ने से पहले कानूनी और वित्तीय सलाह जरूर लें।

क्या यह B2B OTT Aggregator Business सही बिजनेस मॉडल है?

सीधे शब्दों में कहें तो—नहीं।

एक पारदर्शी (Transparent) बिजनेस में आपका निवेश किया हुआ पैसा तब तक आपका होना चाहिए जब तक आप उसे इस्तेमाल न कर लें। स्टॉक या इन्वेंट्री की एक्सपायरी समझ आती है (जैसे खाने-पीने की चीजें), लेकिन ‘डिजिटल करेंसी’ या ‘वॉलेट बैलेंस’ को एक्सपायर करना एक Predatory Practice (शोषक नीति) है। यह बिजनेस नहीं, बल्कि एक तरह का ‘Inventory Loading Scam’ है, जहाँ रिस्क पूरी तरह डीलर का होता है और प्रॉफिट पूरी तरह कंपनी का।

सही B2B OTT Aggregator Business model बिज़नेस कैसा होना चाहिए?

Dealer को Non-Expiring Inventory मिलनी चाहिए।

Aggregator को Transparent Commission Model अपनाना चाहिए।

Risk और Reward दोनों Fairly Distributed होने चाहिए।

सावधानी कैसे बरतें?

Agreement को ध्यान से पढ़ें, क्या वॉलेट बैलेंस की कोई एक्सपायरी डेट है? अगर है, तो वहां से तुरंत हट जाएं।

शुरुआत में बड़ी रकम न फंसाएं। पहले देखें कि मार्केट में रिस्पॉन्स कैसा है।

क्या कंपनी अनसोल्ड (Unsold) स्टॉक या बैलेंस को रिफंड करने की गारंटी देती है?

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