भारत है अगला टारगेट? विदेशी नेटवर्क और फंडिंग का पर्दाफाश!

हाल ही में एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और देशों की आंतरिक सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या दुनिया भर में हो रहे ‘छात्र प्रदर्शन’ वाकई सिर्फ छात्रों की मांग हैं, या फिर इसके पीछे कोई गहरा अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र है? हाल ही में अमेरिकी मीडिया और पत्रकारों के दावों ने फ्रांस से लेकर भारत तक हड़कंप मचा दिया है।

भारत है अगला टारगेट? विदेशी नेटवर्क और फंडिंग का पर्दाफाश!
अमेरिकी पत्रकार अस्रा नोमानी और फॉक्स न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार फ्रांस और भारत में हो रहे छात्र प्रदर्शनों के पीछे विदेशी फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का संभावित प्रभाव। जानिए पूरा मामला।

फ्रांस के प्रदर्शनों का असली सच क्या है?

फॉक्स न्यूज़ (Fox News) की एक ताजा इन्वेस्टिगेशन में फ्रांस में चल रहे छात्र विरोध-प्रदर्शनों की गहराई से पड़ताल की गई। इस जांच में इन प्रदर्शनों से जुड़े 50 संगठनों की पहचान की गई है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इन 50 में से केवल 15 संगठन ही असल में छात्रों या युवाओं से जुड़े थे।

बाकी बचे 35 संगठनों में लेबर यूनियन, कम्युनिस्ट और समाजवादी संगठन, राजनीतिक पार्टियां और फिलिस्तीन का समर्थन करने वाले समूह शामिल हैं। रिपोर्ट में साफ तौर पर आरोप लगाया गया है कि इन प्रदर्शनों को विदेशी फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय कम्युनिस्ट व इस्लामी नेटवर्क्स के जरिए हवा दी जा रही है।

अगला टारगेट: भारत – अमेरिकी पत्रकार की चेतावनी

इस पूरे मामले में सबसे सनसनीखेज दावा अमेरिकी पत्रकार अस्रा नोमानी (Asra Nomani) ने किया है। उन्होंने फ्रांस के इन तथाकथित ‘छात्र प्रदर्शनों’ का सीधा कनेक्शन भारत में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों से जोड़ा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पहले ट्विटर) पर नोमानी ने अपनी रिपोर्ट साझा करते हुए एक गंभीर चेतावनी दी है – “NEXT: INDIA” (अगला टारगेट: भारत)। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन घटनाओं को लेकर उन्होंने पहले आगाह किया था, वे अब हकीकत में बदल रही हैं। उनके अनुसार, कुछ विशेष विचारधारा वाले लोग अपने व्यापक कम्युनिस्ट एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए मासूम छात्रों और उनके आंदोलनों का मोहरे की तरह इस्तेमाल करते हैं।

 

विदेशी फंडिंग और नेविल रॉय सिंघम का कनेक्शन

अस्रा नोमानी ने अपनी पोस्ट में शंघाई में रह रहे अमेरिकी मूल के कारोबारी नेविल रॉय सिंघम (Neville Roy Singham) का भी प्रमुखता से जिक्र किया है। आरोप है कि सिंघम से जुड़े लाखों डॉलर्स का इस्तेमाल भारत में प्रोपेगैंडा (Propaganda) फैलाने और प्रभाव बढ़ाने वाले अभियानों के लिए किया जा रहा है। नोमानी ने विजय प्रसाद को सिंघम के करीबी बौद्धिक सहयोगी के रूप में भी चिन्हित किया है, जो इस पूरे नैरेटिव को गढ़ने में मदद करते हैं।

क्या हमें सतर्क होने की जरूरत है?

यह रिपोर्ट और इसके दावे इस बात की ओर इशारा करते हैं कि आज के दौर में विरोध-प्रदर्शन सिर्फ एक स्थानीय या छात्रों का मुद्दा नहीं रह गए हैं। विदेशी ताकतें अपने हित साधने और देशों में अस्थिरता फैलाने के लिए इन्हें एक टूल की तरह इस्तेमाल कर रही हैं। क्या वाकई हमारे देश के युवा अनजाने में किसी विदेशी एजेंडे का हिस्सा बन रहे हैं? यह एक ऐसा सवाल है जिस पर सरकार से लेकर आम नागरिक तक, सभी को गहराई से विचार करना चाहिए।

हरीश साल्वे ने जताई थी विदेशी फंडिंग की आशंका

वरिष्ठ वकील और भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने सोमवार को कहा था कि देश में चल रहे आंदोलन की फंडिंग विदेशों से हो रही है और इसके पीछे विदेशी ताकतें हैं. उन्होंने कहा कि भारत में बांग्लादेश और नेपाल जैसा माहौल बनाने की कोशिश हो रही है.

यह कैसे हो रहा है?

सोशल मीडिया पर ऐसे ग्रुप बने हुए है जो किसी ख़ास विचारधारा को सपोर्ट करते है। इनमे केवल उन्ही लोगो को रखा जाता है, बाकि लोगो को रिमूव किया जाता है या उन्हें Approve नहीं किया जाता है।

फिर जैसे ही रात में 10-11 बजते है, इन सोशल मीडिया चैनल्स पर लाइव प्रसारण चालू होता है। ज्यादातर ऑडियो Zoom मीटिंग के जैसा, और इसमें जुड़े हुए मुख्य लोगो जैसे कि भरष्टाचार के आरोप के निकाले गए पूर्व पत्रकार, वकील, किसी जाति के नेता, धर्म परिवर्तन की वकालत करने वाले मसीहा, और किसी ख़ास वर्ग को भ्रमित करके उनका संगठन बनाकर तथाकथित नेताओ के द्वारा एक-एक करने भड़काऊ भाषण दिए जाते है,

ये अपने users को बताते है प्रोटेस्ट कैसे करना है, भविष्य कैसे बचाना है, घर की स्त्रियों को आगे करके कैसे बचना है, और उन्ही के द्वारा पुलिस इत्यादि को कैसे फ़साना है, बातें भी होती है। और इस ग्रुप में जुड़े हुए करोडो यूजर उसे सुनते है।

यहाँ तक की ये लोग देश की सरकार, पुलिस, प्रधानमंत्री, सभी को गाली या बहुत ही अभद्र भाषा का इस्तेमाल भी करते है।

अगर आपको उदाहरण देखना है, तो इनके जैसे बनकर इनके Twitter(X) ग्रुप में जुड़े, फिर इनकी ऑडियो रिकॉर्ड करे, ये गारंटी है इनके मनसूबे सुनकर आप पसीने से गीले हो जायेगे। बहुत से ग्रुप फेसबुक पर भी एक्टिव है।

सोशल मीडिया भी संदेह के घेरे में –

इन प्रोपेगंडा को आगे बढ़ाने में सोशल मीडिया भी अपनी भूमिका अदा कर रहा है, हमें कुछ ऐसे लोगो से जानकारी प्राप्त हुयी है, जिन्होंने इन प्रोटेस्टर को फॉलो नहीं कर रखा था, लेकिन फिर भी इन्हे बार बार नोटिफिकेशन मिल रहे है।

राष्ट्रभक्ति की परीक्षा –

तो देश के वे लोग जो इन ग्रूपो में जुड़े हुए है अगर उनमे थोड़ी से भी देशभक्ति है तो रात्रि में होने वाले भाषण रिकॉर्ड करके उन्हें पब्लिक करे, अर्थात इनका नकाब उतारने का काम चोरी चुपचाप कर सकते है, आपकी पोस्ट वायरल भी होगी, मतलब पैसा भी, और देश की सेवा का भी अवसर मिलेगा। ये धर्म का कार्य और धर्म और देश की रक्षा होगी।

Disclaimer: यह सिर्फ़ उपलब्ध मीडिया सोर्स पर आधारित एक ब्लॉग पोस्ट है, कोई न्यूज़ रिपोर्ट नहीं। हमारा मकसद किसी भी जाति, धर्म या समूह को टारगेट करना या उनकी भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है। कोई भी निष्कर्ष या अंदाज़ा लगाने से पहले कृपया दिए गए सोर्स से फैक्ट्स वेरिफ़ाई कर लें।

 

Aaj Tak – फ्रांस में प्रोटेस्ट के पीछे इस्लामी और वामपंथी नेटवर्क, भारत अगला टारगेट!
https://www.aajtak.in/world/story/fox-news-asra-nomani-foreign-funding-accusations-france-india-student-protests-ntc-acwi-dskc-2669100-2026-10-13

Navbharat Times – फ्रांस में प्रदर्शन के पीछे मुस्लिम और वामपंथी, भारत अगला टारगेट!’, अमेरिकी पत्रकार की बड़ी चेतावनी
https://navbharattimes.indiatimes.com/world/rest-of-europe/france-student-protests-report-claim-communists-unions-islami-network-behind-riots-india-target/articleshow/134909243.cms

Fox News – यह रिपोर्ट फ्रांस के छात्र प्रदर्शनों के पीछे काम कर रहे 50 संगठनों (जिनमें से अधिकांश कम्युनिस्ट और लेबर यूनियन हैं) का खुलासा करती है।
https://www.foxnews.com/world/behind-frances-student-riots-communists-unions-global-propaganda-network

अगला टारगेट: भारत – अमेरिकी पत्रकार की चेतावनी
https://x.com/AsraNomani/status/2108900878602146257

 

 

Tags: Foreign Funding, Student Protests, Asra Nomani, Fox News Investigation, India Target, Harish Salve, Neville Roy Singham, Protest Conspiracy.

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