आज के समय में, जहाँ लाखों युवा एक अच्छी पढ़ाई (जैसे MBA) करने के बाद एक सुरक्षित कॉर्पोरेट नौकरी का सपना देखते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी लोग हैं जो बनी-बनाई राह को छोड़कर अपना रास्ता खुद बनाते हैं। आज हम एक ऐसे ही शख्स की कहानी लेकर आए हैं, जिन्होंने एक अच्छी-खासी नौकरी को अलविदा कहा और ‘कबाड़’ से एक सफल बिजनेस साम्राज्य खड़ा कर दिया।
मिलिए ओडिशा के मयूरभंज जिले के रहने वाले शिशिर कुमार जेना से। उनकी यह कहानी जुनून, इनोवेशन और ‘बेस्ट फ्रॉम वेस्ट’ का एक शानदार उदाहरण है।
MBA की डिग्री और कॉर्पोरेट नौकरी –
शिशिर कुमार जेना ने 2008 में अपनी MBA की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद, उन्होंने वही रास्ता चुना जो ज्यादातर लोग चुनते हैं – एक कॉर्पोरेट नौकरी। उन्होंने चार साल तक नौकरी की, लेकिन शायद उनका दिल इस 9-से-5 के रूटीन के लिए नहीं बना था। उनके अंदर कुछ अपना करने की, कुछ अलग बनाने की चाह थी।
पिता से मिली प्रेरणा –
शिशिर को कला की प्रेरणा अपने पिता से मिली। वह अपने पिता को कैनवास पर पेंटिंग करते हुए देखते बड़े हुए थे। वहीं से उन्होंने ओडिशा की पारंपरिक पेंटिंग सीखी। यही कला और जुनून आगे चलकर उनके बिजनेस की नींव बनने वाला था।
2012: ‘आर्ट गोदाम’ की शुरुआत: साल 2012 में शिशिर ने एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने अपनी कॉर्पोरेट नौकरी पर लात मारी और अपने सपने को पूरा करने के लिए पहला कदम बढ़ाया। उन्होंने “आर्ट गोदाम” (Art Godam) नाम से अपने वेंचर की शुरुआत की।
अनोखा बिजनेस मॉडल –
“जीरो इन्वेस्टमेंट”: शिशिर के बिजनेस की सबसे खास बात थी उनका “जीरो इन्वेस्टमेंट” मॉडल। उन्होंने एक भी रुपया लगाए बिना अपना काम शुरू किया। अब आप सोच रहे होंगे, यह कैसे संभव है?
शिशिर ने उन चीजों को अपना कच्चा माल बनाया, जिन्हें लोग बेकार या ‘कबाड़’ समझकर फेंक देते हैं। उन्होंने प्लास्टिक की बोतलों, नारियल के खोल (खोल), और रद्दी कागज जैसी चीजों को इकट्ठा करना शुरू किया। अपनी कला और रचनात्मकता का इस्तेमाल करके, उन्होंने इस कबाड़ को खूबसूरत सजावटी सामानों (Decorative Items) में बदलना शुरू कर दिया।
संघर्ष और सफलता –
जैसा कि हर नए काम में होता है, शुरुआत आसान नहीं थी। शिशिर को भी पहले एक साल तक काफी संघर्ष करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वह मेहनत और लगन से अपने काम में जुटे रहे।
जल्द ही उनकी मेहनत रंग लाने लगी। उनके बनाए यूनिक और ईको-फ्रेंडली सजावटी सामान लोगों को पसंद आने लगे। दो से तीन साल के भीतर ही शिशिर की कमाई लाखों में होने लगी।
आज का मुकाम –
जो सफर एक ‘जीरो इन्वेस्टमेंट’ आईडिया से शुरू हुआ था, वह आज एक सफल वेंचर बन चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिशिर जेना के “आर्ट गोदाम” का सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक पहुँच गया है और यह जल्द ही 1 करोड़ रुपये के आंकड़े को छूने की राह पर है।
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